चार्ल्स डार्विन के जन्मदिवस (12 फ़रवरी) के अवसर पर 15 फ़रवरी को ‘दिशा छात्र संगठन’ और ‘साइंटिस्ट्स फॉर सोसायटी’ के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘हरकिशन मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रोहतक’ में व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था “डार्विन के ‘प्राकृतिक चयन’ सिद्धान्त की प्रासंगिकता और युवाल नोआ हरारी की ‘सेपियन्स’”। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ नवमीत रहे जोकि स्वास्थ्यकर्मी हैं और विज्ञान व स्वास्थ्य के मसलों पर नियमित लेखनकार्य करते रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता ख्यात स्वास्थ्यकर्मी और हरियाणा में ज्ञान-विज्ञान आन्दोलन के प्रमुख हस्ताक्षर डॉ रणवीर सिंह दहिया ने की और मंच संचालन सइंटिस्ट्स फ़ॉर सोसायटी की ओर से रोहिल के द्वारा किया गया।

दिशा छात्र संगठन के मनजीत ने बताया कि डॉ. नवमीत ने अपने व्याख्यान में डार्विन के उद्विकास के ‘प्राकृतिक चयन’ सिद्धान्त को सरल ढंग से स्पष्ट करते हुए इसके सम्बन्ध में प्रचलित भ्रान्तियों एवं विकृत व्याख्याओं की वैज्ञानिक समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने डार्विन से पहले के जीव विज्ञानियों का ज़िक्र किया और डार्विन के समय की सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक स्थिति पर भी रोशनी डाली। डॉ नवमीत ने हर्बर्ट स्पेन्सर और माल्थस से लेकर युवाल नोआ हरारी तक के बुर्जुआ विचारकों के तथाकथित समाजशास्त्रीय और अवैज्ञानिक सिद्धान्तों की पड़ताल पेश की। इसके साथ ही उन्होंने आधुनिक जीव विज्ञान और अनुवांशिकी के विकास की कसौटी पर डार्विन की मूल प्रस्थापनाओं को परखते हुए इनकी सटीकता के साथ-साथ इनकी सीमाओं को भी रेखांकित किया।
डॉ नवमीत ने बताया कि चार्ल्स डार्विन एक महान वैज्ञानिक थे और इनके शोधकार्य ने विज्ञान और वैज्ञानिक चिन्तन के विकास में महती योगदान दिया। चार्ल्स डार्विन के निष्कर्षों ने रंग, नस्ल, लिंग और जाति-धर्म को आधार बनाकर पैदा होने वाले श्रेष्ठता बोध के अतार्किक और अवैज्ञानिक विचारों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। डॉ नवमीत ने युवाल नोआ हरारी की पुस्तक ‘सेपियन्स’ में प्रस्तुत प्रमुख तर्कों और निष्कर्षों पर आलोचनात्मक दृष्टि रखते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि हरारी श्रम की भूमिका को नकारते हैं और पूँजीवाद की प्रतियोगिता को मानव स्वभाव पर आरोपित कर देते हैं। उन्होंने हरारी के संज्ञानात्मक सिद्धान्त, तथाकथित म्यूटेशन सिद्धान्त से लेकर उनकी भाषा की समझ व मानव स्वभाव को लेकर उनके नियतिवादी दृष्टिकोण की तार्किक आलोचना पेश की।

व्याख्यान के बाद सवाल-जवाब का लम्बा सत्र चला जिसमें पूछे गये सवालों का डॉ नवमीत ने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। कार्यक्रम में आगे डॉ रणवीर सिंह दहिया ने अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी की और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की महत्ता को अपनी एक हरियाणवी रागनी के माध्यम से रेखांकित किया। अन्त में इन्द्रजीत ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि युवाओं और आम लोगों में वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण को विकसित करने के उद्देश्य से इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन हम भविष्य में भी जारी रखेंगे।
कार्यक्रम में शहर के कई सारे छात्रों-युवाओं और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की।
धन्यवाद सहित,
– दिशा छात्र संगठन
– साइंटिस्ट्स फ़ॉर सोसायटी

